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ऊँ ह्रीँ चन्द्रप्रभ जिनेन्द्राय नमः

खाण्डव प्रस्थ वन मे जो सिसाना बागपत उ. प

चलो चले हम अपनी प्राचिन धरोहर कि और ।। महाभारत के समय के खाण्डव प्रस्थ वन मे जो सिसाना बागपत उ. प्र मे है वहा पर स्तिथ जैन जिनालय कि और जहा...

चंदा प्रभु चालीसा

वीतराग सर्वज्ञ जिन, जिनवाणी को ध्याय लिखने का साहस करूँ, चालीसा सिर नाय ॥1॥  देहरे के श्री चन्द्र को, पुजों मन वच काय रिद्धि सिद्धि मंगल कर...